अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस (International Day of Mine Awareness and Assistance in Mine Action) हर साल 4 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में बारूदी सुरंगों (Landmines) और विस्फोटक अवशेषों (Explosive Remnants of War – ERW) से उत्पन्न खतरों के बारे में जागरूकता फैलाना और उनकी सफाई में सहायता प्रदान करना है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा यह दिवस 8 दिसंबर 2005 को घोषित किया गया था, और 2006 से इसे हर साल वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। यह दिन युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भूमि पुनर्वास, और प्रभावित समुदायों की सहायता करने पर केंद्रित है।

बारूदी सुरंग (Landmines) क्या होती हैं?

बारूदी सुरंगें छिपे हुए विस्फोटक उपकरण होते हैं जो ज़मीन के नीचे या सतह पर रखे जाते हैं और जब कोई व्यक्ति या वाहन उन पर दबाव डालता है तो वे विस्फोट कर जाते हैं। इनका उपयोग युद्ध के दौरान किया जाता है, लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद भी ये सुरंगें ज़मीन में छिपी रहती हैं और आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं।

1. बारूदी सुरंगों के प्रकार:

    • विरोधी-पैदल सैनिक (Anti-Personnel Mines): ये सुरंगें विशेष रूप से इंसानों को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाई जाती हैं और मामूली दबाव पर भी फट सकती हैं।
    • विरोधी-वाहन (Anti-Vehicle Mines): ये भारी वाहनों को नुकसान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं और अधिक दबाव पड़ने पर विस्फोट करती हैं।
    • इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs): ये सुरंगें विशेष रूप से विद्रोही समूहों और आतंकवादी संगठनों द्वारा उपयोग की जाती हैं और इन्हें दूर से नियंत्रित किया जा सकता है।

    2. बारूदी सुरंगों का प्रभाव

    • नागरिकों की मृत्यु और अपंगता: हर साल हज़ारों निर्दोष लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल होते हैं, इन सुरंगों की चपेट में आकर मारे जाते हैं या स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं।
    • आर्थिक नुकसान: खदानों के कारण कृषि भूमि उपयोग में नहीं आ सकती, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में गरीबी और भुखमरी बढ़ती है।
    • शिक्षा और विकास पर प्रभाव: स्कूलों, सड़कों और अस्पतालों के पास छिपी खदानें लोगों को बुनियादी सेवाओं तक पहुँचने से रोकती हैं।
    • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: युद्धग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में बारूदी सुरंगों का डर मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना को जन्म देता है।

    अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस का महत्व

    • यह दिन दुनिया भर के देशों को बारूदी सुरंगों की सफाई और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रेरित करता है।
    • संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठन खदान निष्कासन (Mine Clearance), पीड़ितों की मदद, और पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रम चलाते हैं।
    • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति खदानों के खतरे के बीच न रहे और सुरक्षित जीवन जी सके।

    कैसे मनाया जाता है यह दिवस?

    • शिक्षा और जागरूकता अभियान: स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों में खदानों के खतरे और उनसे बचाव के तरीकों पर सेमिनार और कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं।
    • विज्ञान और तकनीकी विकास: बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए नए उपकरण और तकनीकें विकसित की जाती हैं।
    • विकसित देशों की सहायता: संयुक्त राष्ट्र और अन्य विकसित देश, युद्धग्रस्त देशों को विस्फोटक सफाई और पुनर्वास में सहायता प्रदान करते हैं।
    • सोशल मीडिया कैंपेन: इस दिन #MineAwareness और #SafeGround जैसे हैशटैग के साथ खदानों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाई जाती है।
    • खदान पीड़ितों के लिए समर्थन कार्यक्रम: जिन लोगों ने बारूदी सुरंगों के कारण अपने अंग खो दिए हैं, उनके लिए कृत्रिम अंग (Prosthetics) और पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

    संयुक्त राष्ट्र (UN) और खदान निष्कासन प्रयास

    संयुक्त राष्ट्र द्वारा खदानों को समाप्त करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

    • UNMAS (United Nations Mine Action Service):
      • यह संगठन बारूदी सुरंगों की पहचान और सफाई में सहायता करता है।
      • खदान प्रभावित देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
    • “Safe Ground, Safe Steps, Safe Home” पहल: इस पहल का उद्देश्य दुनिया को खदान मुक्त बनाना और पीड़ितों को समर्थन देना है।
    • माइन बैन ट्रीटी (Mine Ban Treaty – 1997): 
      • इसे “ऑटावा संधि” भी कहा जाता है और यह बारूदी सुरंगों के उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है।
      • 164 देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
    • “International Campaign to Ban Landmines (ICBL)”: यह एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो खदानों के पूर्ण उन्मूलन के लिए काम करता है।

    खदान प्रभावित प्रमुख देश

    आज भी कई देश बारूदी सुरंगों (Landmines) की समस्या से गंभीर रूप से जूझ रहे हैं। इन सुरंगों से न केवल आम नागरिकों की जान को खतरा बना रहता है, बल्कि ये देशों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी बाधा उत्पन्न करती हैं। युद्ध और संघर्ष के कारण इन खदानों की समस्या और भी गंभीर हो गई है। निम्नलिखित देश खदानों से सर्वाधिक प्रभावित हैं:

    1. अफगानिस्तान: अफगानिस्तान दशकों से युद्ध और संघर्ष का सामना कर रहा है, जिसके चलते यहाँ बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं। आज भी ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में ये सुरंगें लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई हैं।
    2. कंबोडिया: कंबोडिया में 1970 और 1980 के दशक में हुए गृहयुद्ध के दौरान लाखों बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं। अब भी देश के कई हिस्सों में यह समस्या बनी हुई है, और लोग जान-माल की हानि झेल रहे हैं।
    3. इराक: इराक में पिछले कई दशकों में हुए युद्धों के कारण भूमि में बारूदी सुरंगें और अविश्फोटित विस्फोटक उपकरण (UXOs) मौजूद हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन इलाकों में गंभीर है जहाँ आतंकी संगठनों और सेना के बीच संघर्ष हुआ था।
    4. सीरिया: सीरिया में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध के कारण पूरे देश में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं। यहाँ के कई क्षेत्रों में युद्ध के बाद भी विस्फोटक उपकरण मौजूद हैं, जो आम नागरिकों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
    5. यमन: यमन में जारी संघर्ष के कारण देश के कई इलाकों में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं। ये सुरंगें न केवल आम नागरिकों बल्कि किसानों और बच्चों के लिए भी खतरनाक बनी हुई हैं।
    6. कोलंबिया: कोलंबिया में दशकों तक चले सशस्त्र संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं। यह समस्या विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में अधिक गंभीर है, जहाँ लोग खेती और अन्य दैनिक कार्यों के दौरान दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।
    7. अफ्रीकी देश: अफ्रीका में भी कई देश खदानों की समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • अंगोला – यहां के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी खदानों का खतरा बना हुआ है।
    • सूडान – लंबे समय तक चले गृहयुद्ध के कारण यहाँ कई इलाके खदानों से प्रभावित हैं।
    • सोमालिया – आतंकवाद और संघर्ष के चलते सोमालिया में बारूदी सुरंगों की समस्या गंभीर बनी हुई है।
    • मोज़ाम्बिक – यहाँ युद्ध के दौरान बिछाई गई खदानों को हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
    समाधान और प्रयास

    इन देशों में बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इन प्रयासों में खदानों की पहचान करना, उन्हें निष्क्रिय करना, और आम जनता को इसके खतरों के बारे में जागरूक करना शामिल है। हालाँकि, यह एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन देशों को इस संकट से बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं।

    महत्वपूर्ण तथ्य

    • हर साल लगभग 5,000 लोग बारूदी सुरंगों के कारण मारे जाते हैं, जिनमें 50% से अधिक बच्चे होते हैं।
    • लगभग 60 देशों में अभी भी बारूदी सुरंगें मौजूद हैं।
    • एक बारूदी सुरंग को लगाने में केवल $3-$10 खर्च होते हैं, लेकिन इसे हटाने में $300 से $1,000 तक का खर्च आता है।
    • सबसे अधिक बारूदी सुरंगों से ग्रसित देश अफगानिस्तान, कंबोडिया, और अंगोला हैं।

    निष्कर्ष

    अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस न केवल एक जागरूकता दिवस है, बल्कि यह दुनिया भर में खदान प्रभावित लोगों की सहायता, भूमि पुनर्वास, और सुरक्षा प्रयासों को तेज करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

    हमें चाहिए कि हम इस मुद्दे पर अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें, खदान सफाई अभियानों का समर्थन करें, और खदान पीड़ितों की मदद करें। जब तक दुनिया पूरी तरह से खदान मुक्त नहीं हो जाती, तब तक यह प्रयास जारी रखना आवश्यक है।

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